श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 61: पाण्डव-सैनिकोंद्वारा भीमकी स्तुति, श्रीकृष्णका दुर्योधनपर आक्षेप, दुर्योधनका उत्तर तथा श्रीकृष्णके द्वारा पाण्डवोंका समाधान एवं शंखध्वनि  »  श्लोक 64
 
 
श्लोक  9.61.64 
यदि नैवंविधं जातु कुर्यां जिह्ममहं रणे।
कुतो वो विजयो भूय: कुतो राज्यं कुतो धनम्॥ ६४॥
 
 
अनुवाद
यदि मैंने युद्ध में ऐसा छल न किया होता तो तुम विजय कैसे प्राप्त करते, राज्य कैसे प्राप्त करते और धन कैसे प्राप्त करते ॥ 64॥
 
If I had not acted in this deceitful manner during the war then how would you have achieved victory, how would you have obtained the kingdom and how would you have obtained the wealth?॥ 64॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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