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mahabharat 9.61.56-57: राजन! उस समय सिद्धों ने कहा, 'बहुत अच्छा, बहुत अच्छा।' तभी एक सुखद, मृदु और पवित्र सुगंध वाली सुखदायक वायु बहने लगी। चारों ओर प्रकाश फैल गया और आकाश नीलम के समान चमक उठा। 56-57   |   mahabharat अध्याय 9.61: पाण्डव-सैनिकोंद्वारा भीमकी स्तुति, श्रीकृष्णका दुर्योधनपर आक्षेप, दुर्योधनका उत्तर तथा श्रीकृष्णके द्वारा पाण्डवोंका समाधान एवं शंखध्वनि   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 61: पाण्डव-सैनिकोंद्वारा भीमकी स्तुति, श्रीकृष्णका दुर्योधनपर आक्षेप, दुर्योधनका उत्तर तथा श्रीकृष्णके द्वारा पाण्डवोंका समाधान एवं शंखध्वनि  »  श्लोक 56-57
 
 
श्लोक  9.61.56-57 
सिद्धाश्च मुमुचुर्वाच: साधु साध्विति पार्थिव॥ ५६॥
ववौ च सुरभिर्वायु: पुण्यगन्धो मृदु: सुख:।
व्यराजंश्च दिश: सर्वा नभो वैदूर्यसंनिभम्॥ ५७॥
 
 
अनुवाद
राजन! उस समय सिद्धों ने कहा, 'बहुत अच्छा, बहुत अच्छा।' तभी एक सुखद, मृदु और पवित्र सुगंध वाली सुखदायक वायु बहने लगी। चारों ओर प्रकाश फैल गया और आकाश नीलम के समान चमक उठा। 56-57
 
King! At that time the Siddhas said, 'Very good, very good.' Then a pleasant, soft and soothing wind with a sacred scent started blowing. Light spread in all directions and the sky shone like sapphire. 56-57.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)