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mahabharat 9.61.55-56h: गंधर्वों ने सुन्दर वाद्य बजाना आरम्भ कर दिया और अप्सराएँ राजा दुर्योधन के लिए मंगल गीत गाने लगीं।   |   mahabharat अध्याय 9.61: पाण्डव-सैनिकोंद्वारा भीमकी स्तुति, श्रीकृष्णका दुर्योधनपर आक्षेप, दुर्योधनका उत्तर तथा श्रीकृष्णके द्वारा पाण्डवोंका समाधान एवं शंखध्वनि   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 61: पाण्डव-सैनिकोंद्वारा भीमकी स्तुति, श्रीकृष्णका दुर्योधनपर आक्षेप, दुर्योधनका उत्तर तथा श्रीकृष्णके द्वारा पाण्डवोंका समाधान एवं शंखध्वनि  »  श्लोक 55-56h
 
 
श्लोक  9.61.55-56h 
अवादयन्त गन्धर्वा वादित्रं सुमनोहरम्॥ ५५॥
जगुश्चाप्सरसो राज्ञो यश:सम्बद्धमेव च।
 
 
अनुवाद
गंधर्वों ने सुन्दर वाद्य बजाना आरम्भ कर दिया और अप्सराएँ राजा दुर्योधन के लिए मंगल गीत गाने लगीं।
 
The Gandharvas started playing beautiful musical instruments and the Apsaras started singing songs auspicious for King Duryodhana.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)