श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 61: पाण्डव-सैनिकोंद्वारा भीमकी स्तुति, श्रीकृष्णका दुर्योधनपर आक्षेप, दुर्योधनका उत्तर तथा श्रीकृष्णके द्वारा पाण्डवोंका समाधान एवं शंखध्वनि  »  श्लोक 54-55h
 
 
श्लोक  9.61.54-55h 
संजय उवाच
अस्य वाक्यस्य निधने कुरुराजस्य धीमत:॥ ५४॥
अपतत् सुमहद् वर्षं पुष्पाणां पुण्यगन्धिनाम्।
 
 
अनुवाद
संजय कहते हैं: हे राजन! जैसे ही बुद्धिमान कुरुराज दुर्योधन ने ये बातें कहीं, वैसे ही उन पर पवित्र और सुगन्धित पुष्पों की भारी वर्षा होने लगी।
 
Sanjaya says: O King! As soon as the wise Kuru King Duryodhana finished saying these words, a heavy shower of sacred and fragrant flowers began to fall upon him. 54 1/2
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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