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mahabharat 9.61.53-54h: अच्युत! मैं अपने मित्रों और सेवकों सहित स्वर्ग को जाऊँगा और तुम सब लोग टूटे हुए हृदय से दयनीय जीवन जीते रहोगे। ॥53 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 9.61: पाण्डव-सैनिकोंद्वारा भीमकी स्तुति, श्रीकृष्णका दुर्योधनपर आक्षेप, दुर्योधनका उत्तर तथा श्रीकृष्णके द्वारा पाण्डवोंका समाधान एवं शंखध्वनि   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 61: पाण्डव-सैनिकोंद्वारा भीमकी स्तुति, श्रीकृष्णका दुर्योधनपर आक्षेप, दुर्योधनका उत्तर तथा श्रीकृष्णके द्वारा पाण्डवोंका समाधान एवं शंखध्वनि  »  श्लोक 53-54h
 
 
श्लोक  9.61.53-54h 
ससुहृत् सानुगश्चैव स्वर्गं गन्ताहमच्युत॥ ५३॥
यूयं निहतसंकल्पा: शोचन्तो वर्तयिष्यथ।
 
 
अनुवाद
अच्युत! मैं अपने मित्रों और सेवकों सहित स्वर्ग को जाऊँगा और तुम सब लोग टूटे हुए हृदय से दयनीय जीवन जीते रहोगे। ॥53 1/2॥
 
Achyuta! I will go to heaven along with my friends and servants, and you all will continue to live a pitiable life with broken hearts. ॥ 53 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)