Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 9.61.52-53h: जो मानवसुख अन्य राजाओं को दुर्लभ हैं और देवताओं को ही प्राप्त होते हैं, वे मुझे प्राप्त हुए हैं। मैंने उत्तम ऐश्वर्य प्राप्त किया है; अतः मुझसे बढ़कर और कौन श्रेष्ठ है?॥52 1/2॥ | mahabharat अध्याय 9.61: पाण्डव-सैनिकोंद्वारा भीमकी स्तुति, श्रीकृष्णका दुर्योधनपर आक्षेप, दुर्योधनका उत्तर तथा श्रीकृष्णके द्वारा पाण्डवोंका समाधान एवं शंखध्वनि । mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जो मानवसुख अन्य राजाओं को दुर्लभ हैं और देवताओं को ही प्राप्त होते हैं, वे मुझे प्राप्त हुए हैं। मैंने उत्तम ऐश्वर्य प्राप्त किया है; अतः मुझसे बढ़कर और कौन श्रेष्ठ है?॥52 1/2॥
I have received the human pleasures which are rare for other kings and are available only to the gods. I have attained the best prosperity; hence who else has had a better end than me?॥ 52 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥