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बृहस्पतेरुशनसो नोपदेश: श्रुतस्त्वया॥ ४८॥
वृद्धा नोपासिताश्चैव हितं वाक्यं न ते श्रुतम्।
अनुवाद
तूने बृहस्पति और शुक्राचार्य की नीतिपूर्ण शिक्षा नहीं सुनी, तूने बड़ों की पूजा नहीं की और तूने उनके हितकारी वचनों पर ध्यान नहीं दिया।
You have not listened to the ethical teachings of Brihaspati and Shukraacharya, you have not worshipped the elders and you have not listened to their beneficial words.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥