vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 9: शल्य पर्व
»
अध्याय 61: पाण्डव-सैनिकोंद्वारा भीमकी स्तुति, श्रीकृष्णका दुर्योधनपर आक्षेप, दुर्योधनका उत्तर तथा श्रीकृष्णके द्वारा पाण्डवोंका समाधान एवं शंखध्वनि
»
श्लोक 47-48h
श्लोक
9.61.47-48h
यान्यकार्याणि चास्माकं कृतानीति प्रभाषसे॥ ४७॥
वैगुण्येन तवात्यर्थं सर्वं हि तदनुष्ठितम्।
अनुवाद
जो अधर्म कर्म तूने हमसे कहे हैं, वे सब तेरे महान दोष के कारण हुए हैं ॥47 1/2॥
The wrongful acts which you are telling us have been committed by you, have all been done due to your great fault. ॥ 47 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×