श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 61: पाण्डव-सैनिकोंद्वारा भीमकी स्तुति, श्रीकृष्णका दुर्योधनपर आक्षेप, दुर्योधनका उत्तर तथा श्रीकृष्णके द्वारा पाण्डवोंका समाधान एवं शंखध्वनि  »  श्लोक 41-42h
 
 
श्लोक  9.61.41-42h 
याच्यमानं मया मूढ पित्र्यमंशं न दित्ससि॥ ४१॥
पाण्डवेभ्य: स्वराज्यं च लोभाच्छकुनिनिश्चयात्।
 
 
अनुवाद
हे मूर्ख! तूने शकुनि की बात मान ली और मेरे अनुरोध करने पर भी लोभ के कारण पाण्डवों को उनकी पैतृक सम्पत्ति, उनका अपना राज्य नहीं देना चाहा।॥41 1/2॥
 
O fool! You accepted the advice of Shakuni and despite my request you did not want to give the Pandavas their ancestral property, their own kingdom due to greed. ॥ 41 1/2॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd