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mahabharat 9.61.3-4: जब कुरुपुत्र दुर्योधन मारा गया, तो पांचाल और संजय अपने दुपट्टे लहराने और गर्जना करने लगे। पृथ्वी हर्ष से भरे इन पांडव योद्धाओं का भार सहन करने में असमर्थ थी।   |   mahabharat अध्याय 9.61: पाण्डव-सैनिकोंद्वारा भीमकी स्तुति, श्रीकृष्णका दुर्योधनपर आक्षेप, दुर्योधनका उत्तर तथा श्रीकृष्णके द्वारा पाण्डवोंका समाधान एवं शंखध्वनि   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 61: पाण्डव-सैनिकोंद्वारा भीमकी स्तुति, श्रीकृष्णका दुर्योधनपर आक्षेप, दुर्योधनका उत्तर तथा श्रीकृष्णके द्वारा पाण्डवोंका समाधान एवं शंखध्वनि  »  श्लोक 3-4
 
 
श्लोक  9.61.3-4 
पञ्चाला सृञ्जयाश्चैव निहते कुरुनन्दने॥ ३॥
आविद्धॺन्नुत्तरीयाणि सिंहनादांश्च नेदिरे।
नैतान् हर्षसमाविष्टानियं सेहे वसुन्धरा॥ ४॥
 
 
अनुवाद
जब कुरुपुत्र दुर्योधन मारा गया, तो पांचाल और संजय अपने दुपट्टे लहराने और गर्जना करने लगे। पृथ्वी हर्ष से भरे इन पांडव योद्धाओं का भार सहन करने में असमर्थ थी।
 
When Duryodhana, the son of Kuru, was killed, the Panchalas and Sanjayas began to wave their dupattas and roar. The earth was unable to bear the weight of these Pandava warriors who were filled with joy.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)