Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 9.61.29-30h: अनेक कुटिल उपायों से धर्मयुद्ध करने वाले हजारों भूमिपालों का वध करने के पश्चात् भी तुम्हें न तो लज्जा आती है और न ही इस पापकर्म से घृणा होती है। | mahabharat अध्याय 9.61: पाण्डव-सैनिकोंद्वारा भीमकी स्तुति, श्रीकृष्णका दुर्योधनपर आक्षेप, दुर्योधनका उत्तर तथा श्रीकृष्णके द्वारा पाण्डवोंका समाधान एवं शंखध्वनि । mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
घातयित्वा महीपालानृजुयुद्धान् सहस्रश:॥ २९॥
जिह्मैरुपायैर्बहुभिर्न ते लज्जा न ते घृणा।
अनुवाद
अनेक कुटिल उपायों से धर्मयुद्ध करने वाले हजारों भूमिपालों का वध करने के पश्चात् भी तुम्हें न तो लज्जा आती है और न ही इस पापकर्म से घृणा होती है।
After killing thousands of Bhumipala's who easily fought a righteous war through many devious means, you neither feel ashamed nor do you feel disgusted by this evil deed.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥