vedamrit
Reset
Home
ग्रन्थ
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
श्रीमद् भगवद गीता
______________
श्री विष्णु पुराण
श्रीमद् भागवतम
______________
श्रीचैतन्य भागवत
वैष्णव भजन
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 9: शल्य पर्व
»
अध्याय 61: पाण्डव-सैनिकोंद्वारा भीमकी स्तुति, श्रीकृष्णका दुर्योधनपर आक्षेप, दुर्योधनका उत्तर तथा श्रीकृष्णके द्वारा पाण्डवोंका समाधान एवं शंखध्वनि
»
श्लोक 28-29h
श्लोक
9.61.28-29h
ऊरू भिन्धीति भीमस्य स्मृतिं मिथ्या प्रयच्छता॥ २८॥
किं न विज्ञातमेतन्मे यदर्जुनमवोचथा:।
अनुवाद
‘क्या मैं नहीं जानता कि आपने अर्जुन से क्या कहा था, जब आपने भीमसेन को मेरी जाँघें तोड़ने का झूठा स्मरण कराया था?॥28 1/2॥
‘Am I not aware of what you said to Arjuna while falsely reminding Bhimasena of breaking my thighs?॥ 28 1/2॥
✨ ai-generated
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd