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श्री महाभारत
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पर्व 9: शल्य पर्व
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अध्याय 61: पाण्डव-सैनिकोंद्वारा भीमकी स्तुति, श्रीकृष्णका दुर्योधनपर आक्षेप, दुर्योधनका उत्तर तथा श्रीकृष्णके द्वारा पाण्डवोंका समाधान एवं शंखध्वनि
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श्लोक 28-29h
श्लोक
9.61.28-29h
ऊरू भिन्धीति भीमस्य स्मृतिं मिथ्या प्रयच्छता॥ २८॥
किं न विज्ञातमेतन्मे यदर्जुनमवोचथा:।
अनुवाद
‘क्या मैं नहीं जानता कि आपने अर्जुन से क्या कहा था, जब आपने भीमसेन को मेरी जाँघें तोड़ने का झूठा स्मरण कराया था?॥28 1/2॥
‘Am I not aware of what you said to Arjuna while falsely reminding Bhimasena of breaking my thighs?॥ 28 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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