श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 61: पाण्डव-सैनिकोंद्वारा भीमकी स्तुति, श्रीकृष्णका दुर्योधनपर आक्षेप, दुर्योधनका उत्तर तथा श्रीकृष्णके द्वारा पाण्डवोंका समाधान एवं शंखध्वनि  »  श्लोक 19-20h
 
 
श्लोक  9.61.19-20h 
तदैवैष हत: पापो यदैव निरपत्रप:॥ १९॥
लुब्ध: पापसहायश्च सुहृदां शासनातिग:।
 
 
अनुवाद
यह निर्लज्ज पापी उसी समय मर गया था जब वह लोभ में फँसकर पापियों को अपना सहायक बनाकर मित्र-शासन से विमुख रहने लगा था॥19 1/2॥
 
This shameless sinner had died the moment he got trapped in greed and started staying away from the rule of friends by making sinners his helpers.॥ 19 1/2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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