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mahabharat 9.61.15: भरत! जैसे वृत्रासुर के वध के पश्चात् बंदीगणों ने इन्द्र का सत्कार किया था, उसी प्रकार हम शत्रुओं का संहार करने वाले आपका सत्कार करते हैं॥15॥   |   mahabharat अध्याय 9.61: पाण्डव-सैनिकोंद्वारा भीमकी स्तुति, श्रीकृष्णका दुर्योधनपर आक्षेप, दुर्योधनका उत्तर तथा श्रीकृष्णके द्वारा पाण्डवोंका समाधान एवं शंखध्वनि   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 61: पाण्डव-सैनिकोंद्वारा भीमकी स्तुति, श्रीकृष्णका दुर्योधनपर आक्षेप, दुर्योधनका उत्तर तथा श्रीकृष्णके द्वारा पाण्डवोंका समाधान एवं शंखध्वनि  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  9.61.15 
एवं नूनं हते वृत्रे शक्रं नन्दन्ति वन्दिन:।
तथा त्वां निहतामित्रं वयं नन्दाम भारत॥ १५॥
 
 
अनुवाद
भरत! जैसे वृत्रासुर के वध के पश्चात् बंदीगणों ने इन्द्र का सत्कार किया था, उसी प्रकार हम शत्रुओं का संहार करने वाले आपका सत्कार करते हैं॥15॥
 
Bharata! Indeed, just as the prisoners felicitated Indra after the killing of Vritraasura, in the same manner we, the slayer of enemies, felicitate you.॥ 15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)