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वैरस्य च गत: पारं त्वमिहान्यै: सुदुर्गमम्।
अशक्यमेतदन्येन सम्पादयितुमीदृशम्॥ १०॥
अनुवाद
तुमने वैर के उस सागर को पार कर लिया है, जहाँ दूसरों के लिए पहुँचना अत्यंत कठिन है। किसी अन्य के लिए ऐसा पराक्रम कर पाना सर्वथा असंभव है।'
‘You have crossed the sea of enmity, where it is extremely difficult for others to reach. It is absolutely impossible for anyone else to perform such feat.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥