श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 60: क्रोधमें भरे हुए बलरामको श्रीकृष्णका समझाना और युुधिष्ठिरके साथ श्रीकृष्णकी तथा भीमसेनकी बातचीत  »  श्लोक 8-9h
 
 
श्लोक  9.60.8-9h 
बलदेवो महाराज ततो वचनमब्रवीत्।
न चैष पतित: कृष्ण केवलं मत्समोऽसम:॥ ८॥
आश्रितस्य तु दौर्बल्यादाश्रय: परिभर्त्स्यते।
 
 
अनुवाद
महाराज! तब बलदेवजी बोले- 'श्रीकृष्ण! राजा दुर्योधन मेरे समान बलवान था। गदायुद्ध में उसकी बराबरी करनेवाला कोई न था। यहाँ अन्याय से केवल दुर्योधन ही नहीं मारा गया है, (मेरा भी अपमान हुआ है) शरण लेनेवाले की दुर्बलता के कारण शरण देनेवाले का भी अपमान हो रहा है।' ॥8 1/2॥
 
Maharaj! Then Baldevji said- 'Sri Krishna! King Duryodhan was as strong as me. There was no one who could match him in mace fighting. Here not only Duryodhan has been killed by injustice, (I have also been insulted) the one who has given shelter is being insulted due to the weakness of the one who has sought shelter.' ॥ 8 1/2॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd