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mahabharat 9.60.48: सौभाग्य से तुमने अपनी माँ और क्रोध, दोनों का ऋण चुका दिया है। हे वीर योद्धा! सौभाग्य से तुम विजयी हुए और सौभाग्य से तुमने अपने शत्रु का वध कर दिया।   |   mahabharat अध्याय 9.60: क्रोधमें भरे हुए बलरामको श्रीकृष्णका समझाना और युुधिष्ठिरके साथ श्रीकृष्णकी तथा भीमसेनकी बातचीत   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 60: क्रोधमें भरे हुए बलरामको श्रीकृष्णका समझाना और युुधिष्ठिरके साथ श्रीकृष्णकी तथा भीमसेनकी बातचीत  »  श्लोक 48
 
 
श्लोक  9.60.48 
दिष्ट्या गतस्त्वमानृण्यं मातु: कोपस्य चोभयो:।
दिष्ट्या जयति दुर्धर्ष दिष्ट्या शत्रुर्निपातित:॥ ४८॥
 
 
अनुवाद
सौभाग्य से तुमने अपनी माँ और क्रोध, दोनों का ऋण चुका दिया है। हे वीर योद्धा! सौभाग्य से तुम विजयी हुए और सौभाग्य से तुमने अपने शत्रु का वध कर दिया।
 
Fortunately you have repaid the debt of both your mother and anger. O brave warrior! Fortunately you were victorious and fortunately you killed your enemy.
 
इति श्रीमहाभारते शल्यपर्वणि गदापर्वणि बलदेवसान्त्वने षष्टितमोऽध्याय:॥ ६०॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत शल्यपर्वके अन्तर्गत गदापर्वमें श्रीकृष्णका बलदेवजीको सान्त्वना देनाविषयक साठवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ६०॥

(दाक्षिणात्य अधिक पाठके ८ १/२ श्लोक मिलाकर कुल ५६ १/२ श्लोक हैं।)
 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)