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mahabharat 9.60.46: महाराज! आपके शत्रुओं का नाश हो गया है। आज यह सम्पूर्ण पृथ्वी, इसके रत्नों से युक्त वनों और पर्वतों सहित, आपकी सेवा में प्रस्तुत है॥ 46॥   |   mahabharat अध्याय 9.60: क्रोधमें भरे हुए बलरामको श्रीकृष्णका समझाना और युुधिष्ठिरके साथ श्रीकृष्णकी तथा भीमसेनकी बातचीत   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  9.60.46 
सेयं रत्नसमाकीर्णा मही सवनपर्वता।
उपावृत्ता महाराज त्वामद्य निहतद्विषम्॥ ४६॥
 
 
अनुवाद
महाराज! आपके शत्रुओं का नाश हो गया है। आज यह सम्पूर्ण पृथ्वी, इसके रत्नों से युक्त वनों और पर्वतों सहित, आपकी सेवा में प्रस्तुत है॥ 46॥
 
‘Maharaj! Your enemies have been destroyed. Today this entire earth, including its forests and mountains filled with gems, is presented to you in your service.’॥ 46॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)