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mahabharat 9.60.36: परन्तु मैं क्या करूँ, धृतराष्ट्र के पुत्रों ने हमें सदैव अपने छल-जाल का शिकार बनाया और बहुत कठोर वचन कहकर हमें वन में भेज दिया॥ 36॥   |   mahabharat अध्याय 9.60: क्रोधमें भरे हुए बलरामको श्रीकृष्णका समझाना और युुधिष्ठिरके साथ श्रीकृष्णकी तथा भीमसेनकी बातचीत   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  9.60.36 
निकृत्या निकृता नित्यं धृतराष्ट्रसुतैर्वयम्।
बहूनि परुषाण्युक्त्वा वनं प्रस्थापिता: स्म ह॥ ३६॥
 
 
अनुवाद
परन्तु मैं क्या करूँ, धृतराष्ट्र के पुत्रों ने हमें सदैव अपने छल-जाल का शिकार बनाया और बहुत कठोर वचन कहकर हमें वन में भेज दिया॥ 36॥
 
But what can I do, the sons of Dhritarashtra always made us victims of their deceitful web and after speaking many harsh words to us, sent us to the forest.॥ 36॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)