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mahabharat 9.60.31: हे प्रजानाथ! जब बलरामजी इस प्रकार द्वारका को चले गए, तब पांचाल, वृष्णिवंशी और पाण्डव योद्धा दुःखी हो गए। उनके हृदय में अब कोई उत्साह नहीं रहा ॥31॥   |   mahabharat अध्याय 9.60: क्रोधमें भरे हुए बलरामको श्रीकृष्णका समझाना और युुधिष्ठिरके साथ श्रीकृष्णकी तथा भीमसेनकी बातचीत   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 60: क्रोधमें भरे हुए बलरामको श्रीकृष्णका समझाना और युुधिष्ठिरके साथ श्रीकृष्णकी तथा भीमसेनकी बातचीत  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  9.60.31 
पञ्चालाश्च सवार्ष्णेया: पाण्डवाश्च विशाम्पते।
रामे द्वारावतीं याते नातिप्रमनसोऽभवन्॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
हे प्रजानाथ! जब बलरामजी इस प्रकार द्वारका को चले गए, तब पांचाल, वृष्णिवंशी और पाण्डव योद्धा दुःखी हो गए। उनके हृदय में अब कोई उत्साह नहीं रहा ॥31॥
 
O Prajanath! When Balarama left for Dwarka in this manner, the Panchalas, Vrishnivanshis and the Pandava warriors became sad. There was no more enthusiasm left in their hearts. ॥ 31॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)