श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 60: क्रोधमें भरे हुए बलरामको श्रीकृष्णका समझाना और युुधिष्ठिरके साथ श्रीकृष्णकी तथा भीमसेनकी बातचीत  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  9.60.26 
संजय उवाच
धर्मच्छलमपि श्रुत्वा केशवात् स विशाम्पते।
नैव प्रीतमना रामो वचनं प्राह संसदि॥ २६॥
 
 
अनुवाद
संजय कहते हैं - प्रजानाथ! भगवान श्रीकृष्ण के मुख से धर्म का यह भ्रामक वर्णन सुनकर बलदेवजी का मन तृप्त नहीं हुआ। उन्होंने भरी सभा में कहा -॥26॥
 
Sanjaya says - Prajanath! Hearing this deceptive explanation of religion from Lord Krishna, Baladevji's mind was not satisfied. He said in the full assembly -॥ 26॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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