Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 9.60.20-21h: श्रीकृष्ण के ये वचन सुनकर ज्ञानी हलधर ने इस प्रकार कहा - 'श्रीकृष्ण! श्रेष्ठ पुरुषों ने धर्म का बहुत अच्छी तरह से पालन किया है; किन्तु धन और काम - इन दो चीजों से वह संकुचित हो जाता है। | mahabharat अध्याय 9.60: क्रोधमें भरे हुए बलरामको श्रीकृष्णका समझाना और युुधिष्ठिरके साथ श्रीकृष्णकी तथा भीमसेनकी बातचीत । mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वासुदेववच: श्रुत्वा सीरभृत् प्राह धर्मवित्॥ २०॥
धर्म: सुचरित: सद्भि: स च द्वाभ्यां नियच्छति।
अनुवाद
श्रीकृष्ण के ये वचन सुनकर ज्ञानी हलधर ने इस प्रकार कहा - 'श्रीकृष्ण! श्रेष्ठ पुरुषों ने धर्म का बहुत अच्छी तरह से पालन किया है; किन्तु धन और काम - इन दो चीजों से वह संकुचित हो जाता है।
On hearing these words of Shri Krishna, the knowledgeable Haldhar said thus - 'Shri Krishna! The best of men have followed the Dharma very well; but it gets narrowed by these two things - wealth and desire.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥