श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 60: क्रोधमें भरे हुए बलरामको श्रीकृष्णका समझाना और युुधिष्ठिरके साथ श्रीकृष्णकी तथा भीमसेनकी बातचीत  »  श्लोक 19-20h
 
 
श्लोक  9.60.19-20h 
अतो दोषं न पश्यामि मा क्रुद्धॺस्व प्रलम्बहन्।
यौन: स्वै: सुखहार्दैश्च सम्बन्ध: सह पाण्डवै:॥ १९॥
तेषां वृद्धॺा हि वृद्धिर्नो मा क्रुध: पुरुषर्षभ।
 
 
अनुवाद
अतः हे बलभद्र! इसमें भीमसेन का कोई दोष नहीं दिखाई देता; अतः आप क्रोधित न हों। पाण्डवों के साथ हमारा भी मैथुन है। हम भी परस्पर सुख देने वाले सौहार्द से बंधे हुए हैं। हे महापुरुष! हमारी भी वृद्धि इन पाण्डवों की वृद्धि के कारण ही है, अतः आप क्रोधित न हों।'॥19 1/2॥
 
‘Therefore, O Balabhadra, I do not see any fault of Bhimasena in this; therefore, do not be angry. We do have sexual relations with the Pandavas. We are also bound by the cordiality that gives mutual happiness. O great man! Our growth is also due to the growth of these Pandavas, therefore, do not be angry.’॥19 1/2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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