श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 60: क्रोधमें भरे हुए बलरामको श्रीकृष्णका समझाना और युुधिष्ठिरके साथ श्रीकृष्णकी तथा भीमसेनकी बातचीत  »  श्लोक 16-17
 
 
श्लोक  9.60.16-17 
प्रतिज्ञापालनं धर्म: क्षत्रियस्येह वेद्‍म्यहम्॥ १६॥
सुयोधनस्य गदया भङ्‍‍क्तास्म्यूरू महाहवे।
इति पूर्वं प्रतिज्ञातं भीमेन हि सभातले॥ १७॥
 
 
अनुवाद
‘मैं मानता हूँ कि इस संसार में क्षत्रिय का कर्तव्य अपनी प्रतिज्ञा का पालन करना है। प्रथम सभा में भीमसेन ने प्रतिज्ञा की थी कि ‘महायुद्ध में मैं अपनी गदा से दुर्योधन की दोनों जाँघें तोड़ दूँगा।’॥16-17॥
 
‘I believe that in this world it is the duty of a Kshatriya to keep his promise. In the first assembly Bhimasena had pledged that ‘In the great war I will break both the thighs of Duryodhan with my mace.’॥ 16-17॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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