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mahabharat 9.6.22-23h: द्रोणपुत्र की यह बात सुनकर सभी राजाओं ने राजा शल्य को घेर लिया और उनका जयकारा लगाया। उन्होंने युद्ध के लिए मन बना लिया और बड़े उत्साह से भर गए।   |   mahabharat अध्याय 9.6: दुर्योधनके पूछनेपर अश्वत्थामाका शल्यको सेनापति बनानेके लिये प्रस्ताव, दुर्योधनका शल्यसे अनुरोध और शल्यद्वारा उसकी स्वीकृति   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 6: दुर्योधनके पूछनेपर अश्वत्थामाका शल्यको सेनापति बनानेके लिये प्रस्ताव, दुर्योधनका शल्यसे अनुरोध और शल्यद्वारा उसकी स्वीकृति  »  श्लोक 22-23h
 
 
श्लोक  9.6.22-23h 
तथोक्ते द्रोणपुत्रेण सर्व एव नराधिपा:।
परिवार्य स्थिता: शल्यं जयशब्दांश्च चक्रिरे॥ २२॥
युद्धाय च मतिं चक्रुरावेशं च परं ययु:।
 
 
अनुवाद
द्रोणपुत्र की यह बात सुनकर सभी राजाओं ने राजा शल्य को घेर लिया और उनका जयकारा लगाया। उन्होंने युद्ध के लिए मन बना लिया और बड़े उत्साह से भर गए।
 
On hearing this from Drona's son, all the kings surrounded King Shalya and started hailing him. He made up his mind for the war and was filled with great enthusiasm.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)