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श्लोक 9.6.1  |
संजय उवाच
अथ हैमवते प्रस्थे स्थित्वा युद्धाभिनन्दिन:।
सर्व एव महायोधास्तत्र तत्र समागता:॥ १॥ |
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| अनुवाद |
| संजय कहते हैं - महाराज ! तत्पश्चात् युद्ध का स्वागत करने वाले सभी महारथी हिमालय के ऊपर समतल भूमि पर डेरा डालकर वहाँ एकत्रित हुए ॥1॥ |
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| Sanjaya says - Maharaj! Thereafter all the great warriors who were welcoming the war assembled there, camping on the plain land above the Himalayas.॥ 1॥ |
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