श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 59: भीमसेनके द्वारा दुर्योधनका तिरस्कार, युधिष्ठिरका भीमसेनको समझाकर अन्यायसे रोकना और दुर्योधनको सान्त्वना देते हुए खेद प्रकट करना  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  9.59.31 
संजय उवाच
एवमुक्त्वा सुदु:खार्तो निशश्वास स पार्थिव:।
विललाप चिरं चापि धर्मपुत्रो युधिष्ठिर:॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
संजय कहते हैं: 'हे राजन! ऐसा कहकर धर्मपुत्र राजा युधिष्ठिर शोक से अभिभूत होकर दीर्घकाल तक विलाप करते रहे।
 
Sanjaya says: 'O King! Having said this, King Yudhishthira, the son of Dharma, being overwhelmed with grief, kept lamenting for a long time, letting out long sighs.
 
इति श्रीमहाभारते शल्यपर्वणि गदापर्वणि युधिष्ठिरविलापे एकोनषष्टितमोऽध्याय:॥ ५९॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत शल्यपर्वके अन्तर्गत गदापर्वमें युधिष्ठिरका विलापविषयक उनसठवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ५९॥

 
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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