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mahabharat 9.59.28-29h: ‘मैं अपने भाइयों और पुत्रों की विधवा बहुओं को, जो शोक से पीड़ित और शोक में डूबी हुई हैं, कैसे देख पाऊँगा?॥28 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 9.59: भीमसेनके द्वारा दुर्योधनका तिरस्कार, युधिष्ठिरका भीमसेनको समझाकर अन्यायसे रोकना और दुर्योधनको सान्त्वना देते हुए खेद प्रकट करना   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 59: भीमसेनके द्वारा दुर्योधनका तिरस्कार, युधिष्ठिरका भीमसेनको समझाकर अन्यायसे रोकना और दुर्योधनको सान्त्वना देते हुए खेद प्रकट करना  »  श्लोक 28-29h
 
 
श्लोक  9.59.28-29h 
भ्रातॄणां चैव पुत्राणां तथा वै शोकविह्वला:॥ २८॥
कथं द्रक्ष्यामि विधवा वधू: शोकपरिप्लुता:।
 
 
अनुवाद
‘मैं अपने भाइयों और पुत्रों की विधवा बहुओं को, जो शोक से पीड़ित और शोक में डूबी हुई हैं, कैसे देख पाऊँगा?॥28 1/2॥
 
‘How will I be able to see the widowed daughters-in-law of my brothers and sons who are grief-stricken and drowned in sorrow?॥ 28 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)