Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 9.59.27-28h: अनघ! तुम्हें अपने लिए शोक नहीं करना चाहिए, तुम तो प्रशंसनीय मृत्यु मर रहे हो। कौरवराज! अब सब प्रकार से हम ही दया के पात्र हैं; क्योंकि उन प्रिय मित्रों और बन्धु-बान्धवों से रहित होकर हमें दुःखमय जीवन व्यतीत करना पड़ेगा॥27 1/2॥ | mahabharat अध्याय 9.59: भीमसेनके द्वारा दुर्योधनका तिरस्कार, युधिष्ठिरका भीमसेनको समझाकर अन्यायसे रोकना और दुर्योधनको सान्त्वना देते हुए खेद प्रकट करना । mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अनघ! तुम्हें अपने लिए शोक नहीं करना चाहिए, तुम तो प्रशंसनीय मृत्यु मर रहे हो। कौरवराज! अब सब प्रकार से हम ही दया के पात्र हैं; क्योंकि उन प्रिय मित्रों और बन्धु-बान्धवों से रहित होकर हमें दुःखमय जीवन व्यतीत करना पड़ेगा॥27 1/2॥
Anagh! You should not grieve for yourself, you are dying a praiseworthy death. King of Kurus! Now in all circumstances we are the ones who are to be pitied; because being devoid of those dear friends and relatives we will have to spend a miserable life.॥ 27 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥