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mahabharat 9.59.23: हे कुरुश्रेष्ठ! इस समय हम आपको मारना चाहते थे और आप हमें मारना चाहते थे। यह निश्चय ही विधाता द्वारा दिया गया हमारे ही पाप कर्मों का भयंकर फल है॥ 23॥   |   mahabharat अध्याय 9.59: भीमसेनके द्वारा दुर्योधनका तिरस्कार, युधिष्ठिरका भीमसेनको समझाकर अन्यायसे रोकना और दुर्योधनको सान्त्वना देते हुए खेद प्रकट करना   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 59: भीमसेनके द्वारा दुर्योधनका तिरस्कार, युधिष्ठिरका भीमसेनको समझाकर अन्यायसे रोकना और दुर्योधनको सान्त्वना देते हुए खेद प्रकट करना  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  9.59.23 
धात्रोपदिष्टं विषमं नूनं फलमसंस्कृतम्।
यद् वयं त्वां जिघांसामस्त्वं चास्मान् कुरुसत्तम॥ २३॥
 
 
अनुवाद
हे कुरुश्रेष्ठ! इस समय हम आपको मारना चाहते थे और आप हमें मारना चाहते थे। यह निश्चय ही विधाता द्वारा दिया गया हमारे ही पाप कर्मों का भयंकर फल है॥ 23॥
 
O best of the Kurus! At this time we wanted to kill you and you wanted to kill us. This is surely the terrible result of our own impure deeds given by the Creator.॥ 23॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)