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mahabharat 9.59.22: हे पिता! आपको दुःखी या क्रोधित नहीं होना चाहिए। अपने लिए भी शोक करना उचित नहीं है। निश्चय ही, सभी लोग अपने पूर्वकृत भयंकर कर्मों का फल भोगते हैं॥ 22॥   |   mahabharat अध्याय 9.59: भीमसेनके द्वारा दुर्योधनका तिरस्कार, युधिष्ठिरका भीमसेनको समझाकर अन्यायसे रोकना और दुर्योधनको सान्त्वना देते हुए खेद प्रकट करना   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 59: भीमसेनके द्वारा दुर्योधनका तिरस्कार, युधिष्ठिरका भीमसेनको समझाकर अन्यायसे रोकना और दुर्योधनको सान्त्वना देते हुए खेद प्रकट करना  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  9.59.22 
तात मन्युर्न ते कार्यो नात्मा शोच्यस्त्वया तथा।
नूनं पूर्वकृतं कर्म सुघोरमनुभूयते॥ २२॥
 
 
अनुवाद
हे पिता! आपको दुःखी या क्रोधित नहीं होना चाहिए। अपने लिए भी शोक करना उचित नहीं है। निश्चय ही, सभी लोग अपने पूर्वकृत भयंकर कर्मों का फल भोगते हैं॥ 22॥
 
‘Father! You should not be sad or angry. Also, it is not right to grieve for yourself. Certainly, everyone suffers the consequences of their previous terrible deeds.॥ 22॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)