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mahabharat 9.59.19: वह पूर्णतः नष्ट हो गया है, उसके मंत्री, भाई और पुत्र भी मारे गए हैं। अब उसे पिंडदान करने वाला कोई नहीं बचा। उसके अतिरिक्त वह हमारा एकमात्र भाई है। तुमने उसके साथ उचित व्यवहार नहीं किया॥19॥   |   mahabharat अध्याय 9.59: भीमसेनके द्वारा दुर्योधनका तिरस्कार, युधिष्ठिरका भीमसेनको समझाकर अन्यायसे रोकना और दुर्योधनको सान्त्वना देते हुए खेद प्रकट करना   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 59: भीमसेनके द्वारा दुर्योधनका तिरस्कार, युधिष्ठिरका भीमसेनको समझाकर अन्यायसे रोकना और दुर्योधनको सान्त्वना देते हुए खेद प्रकट करना  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  9.59.19 
विध्वस्तोऽयं हतामात्यो हतभ्राता हतप्रज:।
उत्सन्नपिण्डो भ्राता च नैतन्न्याय्यं कृतं त्वया॥ १९॥
 
 
अनुवाद
वह पूर्णतः नष्ट हो गया है, उसके मंत्री, भाई और पुत्र भी मारे गए हैं। अब उसे पिंडदान करने वाला कोई नहीं बचा। उसके अतिरिक्त वह हमारा एकमात्र भाई है। तुमने उसके साथ उचित व्यवहार नहीं किया॥19॥
 
He has been completely destroyed, his ministers, brother and son have also been killed. Now there is no one left to offer him Pinda. Apart from him, he is our only brother. You have not treated him fairly.॥ 19॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)