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mahabharat 9.59.17: भीम! ग्यारह अक्षौहिणी सेना के स्वामी और अपने ही सम्बन्धी कुरुराज दुर्योधन को लात मत मारो॥17॥   |   mahabharat अध्याय 9.59: भीमसेनके द्वारा दुर्योधनका तिरस्कार, युधिष्ठिरका भीमसेनको समझाकर अन्यायसे रोकना और दुर्योधनको सान्त्वना देते हुए खेद प्रकट करना   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 59: भीमसेनके द्वारा दुर्योधनका तिरस्कार, युधिष्ठिरका भीमसेनको समझाकर अन्यायसे रोकना और दुर्योधनको सान्त्वना देते हुए खेद प्रकट करना  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  9.59.17 
एकादशचमूनाथं कुरूणामधिपं तथा।
मा स्प्राक्षीर्भीम पादेन राजानं ज्ञातिमेव च॥ १७॥
 
 
अनुवाद
भीम! ग्यारह अक्षौहिणी सेना के स्वामी और अपने ही सम्बन्धी कुरुराज दुर्योधन को लात मत मारो॥17॥
 
Bhima! Do not kick the Kuru King Duryodhana, who is the master of an army of eleven Akshauhinis and your own relative.॥ 17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)