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mahabharat 9.59.14: आपके पुत्र को मारकर बहुत बड़ाई करने तथा बार-बार नाचने-कूदने के पश्चात् धर्मराज युधिष्ठिर ने भीमसेन से यह कहा-॥14॥   |   mahabharat अध्याय 9.59: भीमसेनके द्वारा दुर्योधनका तिरस्कार, युधिष्ठिरका भीमसेनको समझाकर अन्यायसे रोकना और दुर्योधनको सान्त्वना देते हुए खेद प्रकट करना   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 59: भीमसेनके द्वारा दुर्योधनका तिरस्कार, युधिष्ठिरका भीमसेनको समझाकर अन्यायसे रोकना और दुर्योधनको सान्त्वना देते हुए खेद प्रकट करना  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  9.59.14 
तव पुत्रं तथा हत्वा कत्थमानं वृकोदरम्।
नृत्यमानं च बहुशो धर्मराजोऽब्रवीदिदम्॥ १४॥
 
 
अनुवाद
आपके पुत्र को मारकर बहुत बड़ाई करने तथा बार-बार नाचने-कूदने के पश्चात् धर्मराज युधिष्ठिर ने भीमसेन से यह कहा-॥14॥
 
After killing your son and boasting a lot and dancing and jumping around repeatedly, Dharmaraja Yudhishthira said this to Bhimasena -॥ 14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)