श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 59: भीमसेनके द्वारा दुर्योधनका तिरस्कार, युधिष्ठिरका भीमसेनको समझाकर अन्यायसे रोकना और दुर्योधनको सान्त्वना देते हुए खेद प्रकट करना  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  9.59.10 
रजस्वलां द्रौपदीमानयन् ये
ये चाप्यकुर्वन्त सदस्यवस्त्राम्।
तान् पश्यध्वं पाण्डवैर्धार्तराष्ट्रान्
रणे हतांस्तपसा याज्ञसेन्या:॥ १०॥
 
 
अनुवाद
जिन्होंने रजस्वला द्रौपदी को सभा में बुलाया था, जिन्होंने सबके सामने उसका चीरहरण करने का प्रयत्न किया था, वे ही धृतराष्ट्र के पुत्र द्रौपदी की तपस्या के कारण युद्धभूमि में पाण्डवों के हाथों मारे गए। यह सब लोग देखो॥10॥
 
Those who called Draupadi, who was menstruating, to the assembly, those who tried to disrobe her in the presence of everyone, those very sons of Dhritarashtra were killed on the battlefield by the Pandavas due to Draupadi's austerity. See this, everybody.॥10॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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