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mahabharat 9.58.6: बलसूदन इन्द्र ने माया के द्वारा वृत्रासुर का तेज नष्ट कर दिया था, अतः भीमसेन को भी यहाँ माया के बल का आश्रय लेना चाहिए ॥6॥   |   mahabharat अध्याय 9.58: श्रीकृष्ण और अर्जुनकी बातचीत तथा अर्जुनके संकेतके अनुसार भीमसेनका गदासे दुर्योधनकी जाँघें तोड़कर उसे धराशायी करना एवं भीषण उत्पातोंका प्रकट होना   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 58: श्रीकृष्ण और अर्जुनकी बातचीत तथा अर्जुनके संकेतके अनुसार भीमसेनका गदासे दुर्योधनकी जाँघें तोड़कर उसे धराशायी करना एवं भीषण उत्पातोंका प्रकट होना  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  9.58.6 
मायया चाक्षिपत् तेजो वृत्रस्य बलसूदन:।
तस्मान्मायामयं भीम आतिष्ठतु पराक्रमम्॥ ६॥
 
 
अनुवाद
बलसूदन इन्द्र ने माया के द्वारा वृत्रासुर का तेज नष्ट कर दिया था, अतः भीमसेन को भी यहाँ माया के बल का आश्रय लेना चाहिए ॥6॥
 
Balsudan Indra had destroyed the glory of Vritrasura through illusion, hence Bhimsen should also take refuge in the might of illusion here. 6॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)