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mahabharat 9.58.52-53h: भरतश्रेष्ठ! उस समय आकाश में यक्षों, राक्षसों और पिशाचों का महान् कोलाहल सुनाई देने लगा। 52 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 9.58: श्रीकृष्ण और अर्जुनकी बातचीत तथा अर्जुनके संकेतके अनुसार भीमसेनका गदासे दुर्योधनकी जाँघें तोड़कर उसे धराशायी करना एवं भीषण उत्पातोंका प्रकट होना   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 58: श्रीकृष्ण और अर्जुनकी बातचीत तथा अर्जुनके संकेतके अनुसार भीमसेनका गदासे दुर्योधनकी जाँघें तोड़कर उसे धराशायी करना एवं भीषण उत्पातोंका प्रकट होना  »  श्लोक 52-53h
 
 
श्लोक  9.58.52-53h 
यक्षाणां राक्षसानां च पिशाचानां तथैव च॥ ५२॥
अन्तरिक्षे महानाद: श्रूयते भरतर्षभ।
 
 
अनुवाद
भरतश्रेष्ठ! उस समय आकाश में यक्षों, राक्षसों और पिशाचों का महान् कोलाहल सुनाई देने लगा। 52 1/2॥
 
Bharatshrestha! At that time, a great noise of Yakshas, ​​demons and vampires was heard in the sky. 52 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)