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mahabharat 9.58.47: भयंकर कर्म करनेवाले भीमसेन द्वारा चलाई हुई वह गदा वज्र के समान गिरकर दुर्योधन की सुन्दर जाँघों को तोड़ गई ॥47॥   |   mahabharat अध्याय 9.58: श्रीकृष्ण और अर्जुनकी बातचीत तथा अर्जुनके संकेतके अनुसार भीमसेनका गदासे दुर्योधनकी जाँघें तोड़कर उसे धराशायी करना एवं भीषण उत्पातोंका प्रकट होना   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 58: श्रीकृष्ण और अर्जुनकी बातचीत तथा अर्जुनके संकेतके अनुसार भीमसेनका गदासे दुर्योधनकी जाँघें तोड़कर उसे धराशायी करना एवं भीषण उत्पातोंका प्रकट होना  »  श्लोक 47
 
 
श्लोक  9.58.47 
सा वज्रनिष्पेषसमा प्रहिता भीमकर्मणा।
ऊरू दुर्योधनस्याथ बभञ्ज प्रियदर्शनौ॥ ४७॥
 
 
अनुवाद
भयंकर कर्म करनेवाले भीमसेन द्वारा चलाई हुई वह गदा वज्र के समान गिरकर दुर्योधन की सुन्दर जाँघों को तोड़ गई ॥47॥
 
That mace, hurled by the terrible doer of Bhimasena, fell like a thunderbolt and broke the beautiful looking thighs of Duryodhana. ॥ 47॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)