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mahabharat 9.58.37: हे प्रजानाथ! उसे गदा चलाते देख आपका पुत्र सहसा उस स्थान से हट गया और गदा व्यर्थ होकर भूमि पर गिर पड़ी॥37॥   |   mahabharat अध्याय 9.58: श्रीकृष्ण और अर्जुनकी बातचीत तथा अर्जुनके संकेतके अनुसार भीमसेनका गदासे दुर्योधनकी जाँघें तोड़कर उसे धराशायी करना एवं भीषण उत्पातोंका प्रकट होना   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 58: श्रीकृष्ण और अर्जुनकी बातचीत तथा अर्जुनके संकेतके अनुसार भीमसेनका गदासे दुर्योधनकी जाँघें तोड़कर उसे धराशायी करना एवं भीषण उत्पातोंका प्रकट होना  »  श्लोक 37
 
 
श्लोक  9.58.37 
आक्षिपन्तं तु तं दृष्ट्वा पुत्रस्तव विशाम्पते।
अवासर्पत्तत: स्थानात् सा मोघा न्यपतद् भुवि॥ ३७॥
 
 
अनुवाद
हे प्रजानाथ! उसे गदा चलाते देख आपका पुत्र सहसा उस स्थान से हट गया और गदा व्यर्थ होकर भूमि पर गिर पड़ी॥37॥
 
O Prajanath! Seeing him wielding the mace, your son suddenly moved away from that place and the mace became useless and fell on the ground. ॥ 37॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)