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mahabharat 9.58.35: जब अर्जुन ने उस छेद की ओर इशारा किया तो दुर्योधन ने अपनी आँखों की कोरों से उसे देखा और अचानक भीमसेन की ओर बढ़ा।   |   mahabharat अध्याय 9.58: श्रीकृष्ण और अर्जुनकी बातचीत तथा अर्जुनके संकेतके अनुसार भीमसेनका गदासे दुर्योधनकी जाँघें तोड़कर उसे धराशायी करना एवं भीषण उत्पातोंका प्रकट होना   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 58: श्रीकृष्ण और अर्जुनकी बातचीत तथा अर्जुनके संकेतके अनुसार भीमसेनका गदासे दुर्योधनकी जाँघें तोड़कर उसे धराशायी करना एवं भीषण उत्पातोंका प्रकट होना  »  श्लोक 35
 
 
श्लोक  9.58.35 
दुर्योधनस्तु पार्थेन विवरे सम्प्रदर्शिते।
ईषदुन्मिषमाणस्तु सहसा प्रससार ह॥ ३५॥
 
 
अनुवाद
जब अर्जुन ने उस छेद की ओर इशारा किया तो दुर्योधन ने अपनी आँखों की कोरों से उसे देखा और अचानक भीमसेन की ओर बढ़ा।
 
When Arjuna pointed towards the hole, Duryodhan looked at it out of the corner of his eyes and suddenly moved towards Bhimasena.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)