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mahabharat 9.58.34: गदा के प्रहार से उन दोनों के शरीर के सभी अंग क्षतिग्रस्त हो गए और दोनों रक्त से लथपथ हो गए। उस अवस्था में वे हिमालय पर खिले हुए दो पलाश वृक्षों के समान प्रतीत हो रहे थे। 34.   |   mahabharat अध्याय 9.58: श्रीकृष्ण और अर्जुनकी बातचीत तथा अर्जुनके संकेतके अनुसार भीमसेनका गदासे दुर्योधनकी जाँघें तोड़कर उसे धराशायी करना एवं भीषण उत्पातोंका प्रकट होना   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  9.58.34 
जर्जरीकृतसर्वाङ्गौ रुधिरेणाभिसम्प्लुतौ।
ददृशाते हिमवति पुष्पिताविव किंशुकौ॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
गदा के प्रहार से उन दोनों के शरीर के सभी अंग क्षतिग्रस्त हो गए और दोनों रक्त से लथपथ हो गए। उस अवस्था में वे हिमालय पर खिले हुए दो पलाश वृक्षों के समान प्रतीत हो रहे थे। 34.
 
All the body parts of both of them were damaged due to the blows of the mace and both were soaked in blood. In that condition they looked like two Palaash trees blooming on the Himalayas. 34.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)