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mahabharat 9.58.33: बैलों के समान विशाल नेत्रों वाले वे दोनों महाबली योद्धा युद्धभूमि में एक दूसरे पर ऐसे टूट पड़े जैसे कीचड़ में खड़े दो भैंसे।   |   mahabharat अध्याय 9.58: श्रीकृष्ण और अर्जुनकी बातचीत तथा अर्जुनके संकेतके अनुसार भीमसेनका गदासे दुर्योधनकी जाँघें तोड़कर उसे धराशायी करना एवं भीषण उत्पातोंका प्रकट होना   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 58: श्रीकृष्ण और अर्जुनकी बातचीत तथा अर्जुनके संकेतके अनुसार भीमसेनका गदासे दुर्योधनकी जाँघें तोड़कर उसे धराशायी करना एवं भीषण उत्पातोंका प्रकट होना  »  श्लोक 33
 
 
श्लोक  9.58.33 
समरे प्रद्रुतौ तौ तु वृषभाक्षौ तरस्विनौ।
अन्योन्यं जघ्नतुर्वीरौ पङ्कस्थौ महिषाविव॥ ३३॥
 
 
अनुवाद
बैलों के समान विशाल नेत्रों वाले वे दोनों महाबली योद्धा युद्धभूमि में एक दूसरे पर ऐसे टूट पड़े जैसे कीचड़ में खड़े दो भैंसे।
 
Those two mighty warriors with eyes as large as those of bulls attacked each other in the battlefield and attacked each other like two buffaloes standing in the mud.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)