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mahabharat 9.58.31: हे शत्रुओं को कष्ट देने वाले राजा! तब दोनों ने कुछ देर विश्राम किया और फिर पुनः हाथों में बड़ी-बड़ी गदाएँ लेकर क्रोधपूर्वक एक-दूसरे पर प्रहार करने लगे।   |   mahabharat अध्याय 9.58: श्रीकृष्ण और अर्जुनकी बातचीत तथा अर्जुनके संकेतके अनुसार भीमसेनका गदासे दुर्योधनकी जाँघें तोड़कर उसे धराशायी करना एवं भीषण उत्पातोंका प्रकट होना   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 58: श्रीकृष्ण और अर्जुनकी बातचीत तथा अर्जुनके संकेतके अनुसार भीमसेनका गदासे दुर्योधनकी जाँघें तोड़कर उसे धराशायी करना एवं भीषण उत्पातोंका प्रकट होना  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  9.58.31 
तौ मुहूर्तं समाश्वस्य पुनरेव परंतप।
अभ्यहारयतां क्रुद्धौ प्रगृह्य महती गदे॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
हे शत्रुओं को कष्ट देने वाले राजा! तब दोनों ने कुछ देर विश्राम किया और फिर पुनः हाथों में बड़ी-बड़ी गदाएँ लेकर क्रोधपूर्वक एक-दूसरे पर प्रहार करने लगे।
 
O king who torments his enemies! Then both of them rested for a while and then once again took huge maces in their hands and began attacking each other in anger.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)