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mahabharat 9.58.28-29: राजा! जैसे वायु से क्षुब्ध दो समुद्र आपस में टकरा रहे हों अथवा दो मदमस्त हाथी एक-दूसरे पर आक्रमण कर रहे हों, उसी प्रकार जब दो शक्तिशाली योद्धा एक-दूसरे पर समान रूप से आक्रमण कर रहे हों, तब गदाओं की टकराहट की ध्वनि वज्र के समान हो रही थी।   |   mahabharat अध्याय 9.58: श्रीकृष्ण और अर्जुनकी बातचीत तथा अर्जुनके संकेतके अनुसार भीमसेनका गदासे दुर्योधनकी जाँघें तोड़कर उसे धराशायी करना एवं भीषण उत्पातोंका प्रकट होना   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 58: श्रीकृष्ण और अर्जुनकी बातचीत तथा अर्जुनके संकेतके अनुसार भीमसेनका गदासे दुर्योधनकी जाँघें तोड़कर उसे धराशायी करना एवं भीषण उत्पातोंका प्रकट होना  »  श्लोक 28-29
 
 
श्लोक  9.58.28-29 
समं प्रहरतोस्तत्र शूरयोर्बलिनोर्मृधे।
क्षुब्धयोर्वायुना राजन् द्वयोरिव समुद्रयो:॥ २८॥
तयो: प्रहरतोस्तुल्यं मत्तकुञ्जरयोरिव।
गदानिर्घातसंह्राद: प्रहाराणामजायत॥ २९॥
 
 
अनुवाद
राजा! जैसे वायु से क्षुब्ध दो समुद्र आपस में टकरा रहे हों अथवा दो मदमस्त हाथी एक-दूसरे पर आक्रमण कर रहे हों, उसी प्रकार जब दो शक्तिशाली योद्धा एक-दूसरे पर समान रूप से आक्रमण कर रहे हों, तब गदाओं की टकराहट की ध्वनि वज्र के समान हो रही थी।
 
King! Just as two oceans agitated by the wind are clashing with each other or two mad elephants are attacking each other, similarly, when the two powerful warriors were attacking each other equally, the sound of the clashing of the maces was like the thunderbolt.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)