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mahabharat 9.58.27: जब राजा दुर्योधन और भीमसेन विचित्र चक्रों में घूमते हुए गदाओं से टकराए, तब वहाँ अग्नि की ज्वालाएँ प्रकट होने लगीं॥ 27॥   |   mahabharat अध्याय 9.58: श्रीकृष्ण और अर्जुनकी बातचीत तथा अर्जुनके संकेतके अनुसार भीमसेनका गदासे दुर्योधनकी जाँघें तोड़कर उसे धराशायी करना एवं भीषण उत्पातोंका प्रकट होना   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 58: श्रीकृष्ण और अर्जुनकी बातचीत तथा अर्जुनके संकेतके अनुसार भीमसेनका गदासे दुर्योधनकी जाँघें तोड़कर उसे धराशायी करना एवं भीषण उत्पातोंका प्रकट होना  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  9.58.27 
मण्डलानि विचित्राणि चरतोर्नृपभीमयो:।
गदासम्पातजास्तत्र प्रजज्ञु: पावकार्चिष:॥ २७॥
 
 
अनुवाद
जब राजा दुर्योधन और भीमसेन विचित्र चक्रों में घूमते हुए गदाओं से टकराए, तब वहाँ अग्नि की ज्वालाएँ प्रकट होने लगीं॥ 27॥
 
When the maces of King Duryodhana and Bhimasena clashed while they were moving in strange circles, flames of fire began to appear there.॥ 27॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)