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mahabharat 9.58.25: वे दोनों वीर शत्रुता का नाश करने के लिए तत्पर होकर, युद्धभूमि में चंदन और अगुरु से लिपटी हुई अपनी भयंकर गदाएँ घुमाते हुए, क्रोधित मृत्यु के समान प्रकट हुए।   |   mahabharat अध्याय 9.58: श्रीकृष्ण और अर्जुनकी बातचीत तथा अर्जुनके संकेतके अनुसार भीमसेनका गदासे दुर्योधनकी जाँघें तोड़कर उसे धराशायी करना एवं भीषण उत्पातोंका प्रकट होना   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 58: श्रीकृष्ण और अर्जुनकी बातचीत तथा अर्जुनके संकेतके अनुसार भीमसेनका गदासे दुर्योधनकी जाँघें तोड़कर उसे धराशायी करना एवं भीषण उत्पातोंका प्रकट होना  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  9.58.25 
आधुन्वन्तो गदे घोरे चन्दनागरुरूषिते।
वैरस्यान्तं परीप्सन्तौ रणे क्रुद्धाविवान्तकौ॥ २५॥
 
 
अनुवाद
वे दोनों वीर शत्रुता का नाश करने के लिए तत्पर होकर, युद्धभूमि में चंदन और अगुरु से लिपटी हुई अपनी भयंकर गदाएँ घुमाते हुए, क्रोधित मृत्यु के समान प्रकट हुए।
 
Those two heroes, eager to put an end to the enmity, appeared like enraged Death, swinging their fierce maces, smeared with sandalwood and aguru, on the battlefield. 25.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)