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mahabharat 9.58.16: हे धनंजय! जो लोग जीवन की आशा छोड़कर साहसपूर्वक युद्ध में कूद पड़े हैं, उनके सामने इन्द्र भी नहीं टिक सकते॥16॥   |   mahabharat अध्याय 9.58: श्रीकृष्ण और अर्जुनकी बातचीत तथा अर्जुनके संकेतके अनुसार भीमसेनका गदासे दुर्योधनकी जाँघें तोड़कर उसे धराशायी करना एवं भीषण उत्पातोंका प्रकट होना   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 58: श्रीकृष्ण और अर्जुनकी बातचीत तथा अर्जुनके संकेतके अनुसार भीमसेनका गदासे दुर्योधनकी जाँघें तोड़कर उसे धराशायी करना एवं भीषण उत्पातोंका प्रकट होना  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  9.58.16 
साहसोत्पतितानां च निराशानां च जीविते।
न शक्यमग्रत: स्थातुं शक्रेणापि धनंजय॥ १६॥
 
 
अनुवाद
हे धनंजय! जो लोग जीवन की आशा छोड़कर साहसपूर्वक युद्ध में कूद पड़े हैं, उनके सामने इन्द्र भी नहीं टिक सकते॥16॥
 
O Dhananjaya! Even Indra cannot stand before those who have courageously jumped into the battle, giving up all hope of life.॥ 16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)