Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 9.58.13-14: दुर्योधन युद्धकला का ज्ञाता, वीर और दृढ़ निश्चयी है। इस प्रसंग में शुक्राचार्य द्वारा कहा गया एक प्राचीन श्लोक सुनने को मिलता है, जो नीति के सार से परिपूर्ण है। मैं उसे तुम्हें सुना रहा हूँ। मेरे कहने पर तुम उस श्लोक को सुनो।॥13-14॥ | mahabharat अध्याय 9.58: श्रीकृष्ण और अर्जुनकी बातचीत तथा अर्जुनके संकेतके अनुसार भीमसेनका गदासे दुर्योधनकी जाँघें तोड़कर उसे धराशायी करना एवं भीषण उत्पातोंका प्रकट होना । mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
दुर्योधन युद्धकला का ज्ञाता, वीर और दृढ़ निश्चयी है। इस प्रसंग में शुक्राचार्य द्वारा कहा गया एक प्राचीन श्लोक सुनने को मिलता है, जो नीति के सार से परिपूर्ण है। मैं उसे तुम्हें सुना रहा हूँ। मेरे कहने पर तुम उस श्लोक को सुनो।॥13-14॥
Duryodhan knows the art of war, is brave and is determined. In this context, we hear of an ancient verse said by Shukracharya, which is full of the essence of ethics. I am reciting it to you. Listen to that verse at my behest.॥ 13-14॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥