श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 57: भीमसेन और दुर्योधनका गदायुद्ध  »  श्लोक d2
 
 
श्लोक  9.57.d2 
निगृह्य तान् पुनरपि पाण्डवो बली
तवात्मजं स्वयमभिगम्य कालवत्।
चचार च व्यपगतखेदवेपथु:
सुरेश्वरो नमुचिमिवोत्तमं रणे॥ )
 
 
अनुवाद
परन्तु पराक्रमी पाण्डुपुत्र भीम ने उन सबको रोककर काल के समान आपके पुत्र पर पुनः आक्रमण किया और वह बिना किसी खेद और दया के युद्धभूमि में उसी प्रकार विचरण करने लगा, जैसे देवराज इन्द्र महान दैत्य नमुचिपि पर आक्रमण करके युद्धभूमि में विचरण करते थे।
 
But Bheema, son of Pandu, who was powerful, stopped them all and attacked your son again like Kaal and without regret and compassion, he started wandering in the battlefield in the same way as Devraj Indra used to wander in the battlefield after attacking the great demon Namuchipi.
 
इति श्रीमहाभारते शल्यपर्वणि गदापर्वणि गदायुद्धे सप्तपञ्चाशत्तमोऽध्याय:॥ ५७॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत शल्यपर्वके अन्तर्गत गदापर्वमें गदायुद्धविषयक सत्तावनवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ५७॥

(दाक्षिणात्य अधिक पाठके २ श्लोक मिलाकर कुल ७२ श्लोक हैं।)
 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)