श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 57: भीमसेन और दुर्योधनका गदायुद्ध  »  श्लोक 66
 
 
श्लोक  9.57.66 
स पार्थिवो नित्यममर्षितस्तदा
महारथ: शिक्षितवत् परिभ्रमन्।
अताडयत् पाण्डवमग्रत: स्थितं
स विह्वलाङ्गो जगतीमुपास्पृशत्॥ ६६॥
 
 
अनुवाद
महारथी राजा दुर्योधन, जो सदैव क्रोध से भरा रहता था, एक प्रशिक्षित योद्धा की तरह आगे बढ़ा और उसने अपने सामने खड़े भीमसेन पर अपनी गदा से प्रहार किया। इस प्रहार से भीमसेन का पूरा शरीर दुर्बल हो गया और वह जमीन पर गिर पड़ा।
 
The mighty warrior King Duryodhan, who was always full of resentment, moved like a trained warrior and struck Bhimasena, who was standing in front of him, with his mace. Bhimasena's entire body became weak after being struck by this blow and he held the ground.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)